मात्र 5 पत्तों में भरेगा 5 लोगों का पेट! शिक्षक कमलेश तिवारी की ‘जादुई’ राई साग की खेती ने सबको चौंकाया
बिहार के सारण जिले के एक सरकारी शिक्षक कमलेश तिवारी ने खेती में एक नया अध्याय लिख दिया है। छपरा के बेतवानिया गांव के रहने वाले कमलेश ने बिना किसी रासायनिक खाद के राई (सरसों) के साग की ऐसी फसल तैयार की है, जो अब पूरे इलाके में कौतूहल का विषय बनी हुई है।
क्या है इस साग की खासियत? कमलेश तिवारी ने बताया कि इस साग के पत्ते काफी बड़े और मांसल होते हैं। अगर परिवार में पांच सदस्य हैं, तो सिर्फ पांच पत्ते ही पूरे परिवार की सब्जी के लिए काफी हैं। यह देखने में पत्तागोभी जैसा लगता है और हमेशा हरा-भरा रहता है। स्वाद और सेहत के मामले में भी यह पारंपरिक साग से कहीं बेहतर है।
जैविक खेती से बढ़ी आमदनी आज के दौर में जहां किसान खाद और कीटनाशकों के बढ़ते दामों से परेशान हैं, वहीं कमलेश ने इसे पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से उगाया है। उनका कहना है कि अगर मिट्टी में नमी रहे और समय पर पानी दिया जाए, तो किसी भी खाद की जरूरत नहीं पड़ती। किसान इस फसल से अपनी आय को दो से तीन गुना तक बढ़ा सकते हैं।