पूर्वोत्तर में मोदी सरकार का बड़ा धमाका! नागालैंड को मिली ‘FNTA’ की सौगात, बदल जाएगी 6 जिलों की किस्मत

भारत सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पूर्वी नागालैंड को राजनीतिक स्वायत्तता प्रदान कर दी है। 5 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत सरकार, नागालैंड राज्य सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के बीच हुआ है। इस समझौते के तहत राज्य के छह जिलों—तुएनसांग, मोन, किफिरे, लोंगलेंग, नोकलाक और शामतोर—के लिए ‘फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी’ (FNTA) के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस कार्यक्रम को दशकों से चल रहे अहिंसक आंदोलन की जीत माना जा रहा है। 1997 में गठित ENPO ने 2010 से ही कोहिमा प्रशासन द्वारा उपेक्षा का आरोप लगाते हुए एक अलग राज्य ‘फ्रंटियर नागालैंड’ की मांग की थी। हालांकि, केंद्र ने संवैधानिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए अनुच्छेद 371A के तहत बिना किसी संशोधन के स्वायत्तता का यह मॉडल पेश किया है।

FNTA का महत्व और प्रभाव: FNTA एक ऐसा प्रशासनिक तंत्र होगा जो स्थानीय समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास में सीधे निर्णय लेने की शक्ति देगा। अगले 10 वर्षों के लिए इसे एक विशेष अंतरिम व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र के आर्थिक उत्थान के लिए एक बड़े वित्तीय पैकेज का भी आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता नागा उग्रवाद और क्षेत्रीय असंतोष को समाप्त करने में मील का पत्थर साबित होगा। यह न केवल प्रशासनिक सुधार है, बल्कि पूर्वी नागालैंड के लोगों की सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक गरिमा का सम्मान भी है।

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