‘बजट में सिर्फ बांग्ला, हिंदी-अंग्रेजी को नो एंट्री!’ कोलकाता नगर निगम में TMC का कड़ा फरमान

कोलकाता नगर निगम (KMC) के बजट सत्र में इस बार एक अनोखा बदलाव देखने को मिलेगा। अब तक निगम की बैठकों में कोई पार्षद फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता था, तो कोई हिंदी या उर्दू शायरी के जरिए अपनी बात रखता था। लेकिन अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। पार्टी ने अपने पार्षदों के लिए एक सख्त ‘व्हिप’ जारी किया है, जिसके अनुसार बजट सत्र के दौरान सभी पार्षदों को अनिवार्य रूप से केवल बांग्ला भाषा में ही अपनी बात रखनी होगी।
टीएमसी के मुख्य सचेतक बाप्पदित्य दासगुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह फैसला बांग्ला भाषा और बंगाली पहचान (अस्मिता) की रक्षा के लिए लिया गया है। पार्टी का आरोप है कि देश के विभिन्न हिस्सों में बांग्ला बोलने वालों को ‘बांग्लादेशी’ कहकर अपमानित किया जा रहा है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी ने अब ‘बंगाली कार्ड’ को मजबूती से थाम लिया है। पार्टी का मानना है कि यदि संसद में बांग्ला में भाषण दिया जा सकता है, तो कोलकाता नगर निगम में क्यों नहीं?
विपक्ष ने इस फैसले को लोकतांत्रिक आजादी पर हमला बताया है, लेकिन टीएमसी अपने रुख पर अडिग है। बाप्पदित्य दासगुप्ता के अनुसार, “यह रबींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद की भाषा है। अगर इस भाषा को लेकर राजनीति हो रही है, तो हमें इसका जवाब अपनी भाषा में ही देना होगा।” प्रशासन पहले ही दुकानों के साइनबोर्ड और घरों के नक्शे में बांग्ला को अनिवार्य कर चुका है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि २०२६ के विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी भाषाई भावनाओं के जरिए अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।