वोटर लिस्ट सुधार में बड़ा झटका! चुनाव आयोग ने ‘आवास योजना’ के दस्तावेजों को किया अमान्य

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ या राज्य की ‘बंगाल बाड़ी’ परियोजना के दस्तावेजों को मतदाता सूची में नाम शामिल करने या सुधार के लिए पहचान पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
दरअसल, मतदाता सूची संशोधन के दौरान यह भ्रम फैल गया था कि सरकारी घर मिलने का प्रमाण पत्र पते के सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग सुनवाई के दौरान इन योजनाओं के कागजात लेकर पहुंच रहे थे। इस भ्रम को दूर करने के लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने 21 जनवरी को चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा था। सोमवार को आए जवाब में आयोग ने कहा कि विज्ञापन में ‘हाउस अलॉटमेंट सर्टिफिकेट’ का जिक्र है, लेकिन आवास योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता का पत्र इसमें शामिल नहीं है।
आयोग के अनुसार, केवल वही दस्तावेज मान्य होंगे जो चुनाव आयोग की आधिकारिक सूची में दर्ज हैं। बंगाल में एसआईआर की सुनवाई पूरी हो चुकी है और वर्तमान में दस्तावेजों के सत्यापन का काम चल रहा है। निर्वाचन आयोग आगामी 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की तैयारी में है। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिहीन हो, इसलिए इन दस्तावेजों पर रोक लगा दी गई है।