अदालत को अखाड़ा न बनाएं’! हिमंत बिस्वा सरमा के वीडियो विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को लताड़ा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय अदालत को ‘राजनीतिक मैदान’ बनाने की कोशिश न करें। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और सीधे शीर्ष अदालत में आकर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
सीपीआई नेता एनी राजा द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री ने 27 जनवरी को एक जनसभा में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपमानजनक ‘मिया’ शब्द का इस्तेमाल किया। याचिका में दावा किया गया कि हिमंत बिस्वा सरमा ने 4 से 5 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर करने की धमकी दी और कहा कि वह और भाजपा सीधे तौर पर ‘मिया’ लोगों के खिलाफ हैं। साथ ही, एक वायरल वीडियो का भी हवाला दिया गया जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री को राइफल ताने हुए दिखाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनने से इनकार करते हुए इसे गुवाहाटी हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन गई है कि जब भी किसी राज्य में चुनाव होते हैं, तो राजनीतिक लड़ाई को इस अदालत में लाया जाता है।” अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे संवैधानिक नैतिकता का पालन करें और पहले संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। इस फैसले से हिमंत बिस्वा सरमा को बड़ी राहत मिली है, जबकि विपक्षी खेमे की रणनीति विफल साबित हुई है।