पादरियों के प्रवेश पर रोक वाले होर्डिंग्स के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, हाई कोर्ट का फैसला बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के गांवों में ईसाई पादरियों और धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों के प्रवेश पर कथित रूप से रोक लगाने वाले होर्डिंग्स को हटाने की मांग वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के पिछले साल के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिससे याचिकाकर्ताओं को बड़ा कानूनी झटका लगा है।
क्या था पूरा मामला? याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कांकेर जिले के कम से कम आठ गांवों में ऐसे होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिनमें ईसाई पादरियों के प्रवेश को वर्जित बताया गया है। सीनियर वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने दलील दी कि यह ईसाई समुदाय को समाज की मुख्यधारा से अलग करने की कोशिश है। याचिका में दावा किया गया था कि ग्राम पंचायतों ने “हमारी परंपरा हमारी विरासत” के नाम पर संकल्प पारित कर ये कदम उठाए हैं।
अदालत का फैसला: सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत में कई नए तथ्य पेश किए हैं जो हाई कोर्ट के मूल मामले का हिस्सा नहीं थे। इससे पहले हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए होर्डिंग्स लगाना असंवैधानिक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलीलों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को गांव में प्रवेश से रोका जाता है या जान का खतरा महसूस होता है, तो वे पुलिस सुरक्षा की मांग कर सकते हैं।