विकास की कथा सुनाने गए TMC विधायक को ग्रामीणों ने घेरा! विरोध के बाद आनन-फानन में बनाना पड़ा पुल

चुनाव से पहले किए गए वादे जब पूरे नहीं होते, तो जनता हिसाब बराबर करना जानती है। बांकुड़ा के सिमलापाल ब्लॉक में कुछ ऐसा ही हुआ। विकास कार्यों का बखान करने पहुंचे तृणमूल विधायक फाल्गुनी सिंह बाबू को ग्रामीणों ने घेर लिया और पुराने वादों की याद दिलाते हुए जमकर खरी-खोटी सुनाई। ग्रामीणों के इस उग्र विरोध को देख विधायक की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और उन्होंने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए शिलाबती नदी पर एक अस्थायी पुल का निर्माण शुरू करवाया।
क्या है पूरा विवाद? मदारिया घाट पर पक्के पुल की मांग दशकों पुरानी है। करीब ३० गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर बांस के पुल से नदी पार करते थे। २०२४ के उपचुनाव के दौरान विधायक ने वादा किया था कि जीत के बाद पक्का पुल बनेगा। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि जीतने के बाद विधायक ने गांव की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा। हाल ही में जब वे गांव पहुंचे, तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आनन-फानन में सांसद निधि से पैसा आवंटित कर ह्यूम पाइप वाला कच्चा पुल तैयार कराया गया।
बीजेपी का कटाक्ष: भाजपा ने इसे चुनावी हथकंडा करार दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष सरकार ने कहा कि चुनाव नजदीक आते देख अपनी साख बचाने के लिए विधायक केंद्र सरकार के फंड का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, विधायक का कहना है कि उन्होंने अपना वादा निभाया है और फिलहाल यह अस्थायी पुल लोगों की समस्या हल करेगा।