“मेरे शरीर के दो अंग निकाल दिए गए, बताते हुए शर्म आती है!” सीएम ममता का दर्दनाक खुलासा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक जीवन के 15 साल पूरे कर लिए हैं। साल 2011 में वामपंथ के 34 साल के किले को ढहाकर सत्ता में आने वाली ममता बनर्जी आज राज्य की आठवीं और पहली बंगाली महिला मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। हाल ही में एक राष्ट्रीय मीडिया को दिए साक्षात्कार में ममता ने अपने संघर्ष के दिनों की उन यादों को साझा किया, जो आज भी उनके मन और शरीर पर गहरे घाव के समान हैं।
शारीरिक प्रताड़ना पर बड़ा खुलासा: विपक्ष में रहते हुए ममता बनर्जी पर कई बार जानलेवा हमले हुए। सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों के दौरान उन्हें कई बार पुलिस और राजनीतिक विरोधियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। साक्षात्कार के दौरान अपनी चोटों का जिक्र करते हुए ममता ने भावुक होकर कहा, “मेरे शरीर के दो ऐसे अंग निकाल दिए गए हैं… जिसके बारे में बताने में भी लोगों को शर्म आएगी।” यह बयान इस बात का गवाह है कि बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का उनका रास्ता कितना कांटों भरा और रक्तरंजित रहा है।
खो गया राजनीति का शिष्टाचार: ममता बनर्जी ने वर्तमान राजनीति में बढ़ती कड़वाहट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले की राजनीति में मर्यादा और शिष्टाचार था। ममता ने याद करते हुए कहा, “जब ज्योति बसु मुख्यमंत्री थे, तब मैं जरूरत पड़ने पर बेझिझक उनके पास चली जाती थी। आज भी मैं पुराने वामपंथी नेताओं का हाल-चाल लेती हूं। लेकिन आज की राजनीति में वह सौहार्द और सम्मान खत्म हो गया है।” उनका इशारा साफ था कि आज केंद्र और राज्य के बीच जो तल्खी है, वह पहले नहीं हुआ करती थी।
छात्र राजनीति से सत्ता के शिखर तक: 70 के दशक में कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में करियर शुरू करने वाली ममता ने 1984 में सोमनाथ चटर्जी जैसे दिग्गज को हराकर संसद में कदम रखा था। 2006 का सिंगूर आंदोलन उनकी राजनीति का टर्निंग पॉइंट बना, जिसने टाटा नैनो प्रोजेक्ट को राज्य से बाहर कर दिया और ‘मां-माटी-मानुष’ की सरकार का रास्ता साफ किया। आज 15 साल बाद भी ममता दिल्ली के खिलाफ आंदोलन कर रही हों या वोटर लिस्ट (SIR) विवाद पर सड़कों पर उतर रही हों, उनका जुझारू तेवर बरकरार है। लेकिन इस साक्षात्कार ने यह साफ कर दिया कि उनकी जीत के पीछे एक लंबा शारीरिक और मानसिक संघर्ष छिपा है।