‘ममता ने छीने जांच के दस्तावेज!’ सुप्रीम कोर्ट में ईडी का बड़ा दावा, आई-पैक केस में बढ़ीं मुश्किलें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच चल रही कानूनी जंग अब सुप्रीम कोर्ट में एक नए मोड़ पर आ गई है। आई-पैक (I-PAC) कार्यालय में छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप को लेकर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में एक जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। इस हलफनामे में ईडी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ममता बनर्जी ने बलपूर्वक कार्यालय में प्रवेश किया और जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज छीन लिए।

राजनीतिक नहीं, कानूनी कार्रवाई थी – ईडी: ईडी ने अपने हलफनामे में साफ किया है कि 8 जनवरी को आई-पैक के दफ्तर में की गई छापेमारी पूरी तरह से कानूनी थी और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। एजेंसी का कहना है कि मुख्यमंत्री के इस कदम से केंद्रीय एजेंसी के ‘मौलिक अधिकारों’ का हनन हुआ है। अदालत में ईडी के वकील एसवी राजू ने कहा कि वर्तमान में स्थिति ऐसी बन गई है जहां जांच एजेंसी को ही डराया-धमकाया जा रहा है। इसके विपरीत, राज्य सरकार के वकील ने तर्क दिया कि ईडी को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

सुनवाई में देरी और नया शेड्यूल: इससे पहले, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की बीमारी और अन्य तकनीकी कारणों से सुनवाई दो बार टल चुकी थी। 18 फरवरी को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपील की कि वे राज्य के हलफनामे पर एक ‘रिजॉइंडर’ (Rejoinder) दाखिल करना चाहते हैं। उन्होंने होली के बाद सुनवाई की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने अगली तारीख 18 मार्च तय की है।

तृणमूल का पलटवार: तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता तन्मय घोष ने ईडी के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री ने पहले ही अपना पक्ष हलफनामे के जरिए स्पष्ट कर दिया था, तो ईडी अब नए आरोप क्यों लगा रही है? उन्होंने इसे भाजपा की साजिश करार दिया। अब पूरे देश की नजर 18 मार्च पर टिकी है, जब सुप्रीम कोर्ट इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपना रुख स्पष्ट करेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *