‘नौ मास नौ दिन…’ का दिल्ली में धमाका! फैंटम प्रेग्नेंसी जैसी दुर्लभ बीमारी पर बनी फिल्म ने जीते कई अवॉर्ड्स

बंगाली सिनेमा ने एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। निर्देशक सौम्यदीप घोष चौधरी की फिल्म ‘नौ मास नौ दिन और अंतहीन’ (Silence of the Womb) ने दिल्ली में आयोजित 18वें जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और जोधपुर में 12वें राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में कई बड़े पुरस्कार अपने नाम किए हैं। जयपुर में सौम्यदीप को ‘फर्स्ट फीचर फिक्शन फिल्म’ श्रेणी में ‘वेलकम रिगार्ड अवॉर्ड’ से नवाजा गया, जबकि जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में आयोजित समारोह में इसे ‘सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फिल्म’ का गौरव प्राप्त हुआ।
फिल्म की कहानी ‘फैंटम प्रेग्नेंसी’ (Phantom Pregnancy) जैसे संवेदनशील और मनोवैज्ञानिक विषय पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक महिला, जो वास्तव में गर्भवती नहीं है, मानसिक रूप से खुद को गर्भवती मानने लगती है और उसके शरीर में भी वैसे ही लक्षण दिखने लगते हैं। श्रेया भट्टाचार्य और साग्निक मुखर्जी ने मुख्य भूमिकाओं में इस जटिल मानसिक स्थिति और इसके सामाजिक प्रभाव को बखूबी पर्दे पर उतारा है। यह फिल्म पहले ही लंदन और मध्य प्रदेश के फिल्म फेस्टिवल्स में अपनी पहचान बना चुकी है। निर्देशक के अनुसार, यह फिल्म उन महिलाओं के संघर्ष और समाज के बदलते नजरिए की एक मर्मस्पर्शी दास्तां है।