क्या आपको भी है ‘डूम स्क्रॉलिंग’ की बीमारी? स्मार्टफोन की लत छोड़ने के लिए अपनाएं ये जादुई तरीके

“खाली दिमाग शैतान का घर”—यह कहावत आज के डिजिटल युग में ‘खाली हाथ में स्मार्टफोन’ पर सटीक बैठती है। जैसे पुराने समय में लोग बोरियत मिटाने के लिए बार-बार फ्रिज खोलकर देखते थे, वैसे ही आज हम हर ५ मिनट में अपना फोन चेक करते हैं। इसे ‘डूम स्क्रॉलिंग’ कहा जाता है, जहाँ हम अनजाने में नकारात्मक खबरों और अंतहीन फीड में फंस जाते हैं। इस लत से बचने के लिए विशेषज्ञ कुछ विशेष सुझाव देते हैं।

बेडरूम से फोन को करें बाहर: सोने से कम से कम एक घंटा पहले अपने फोन को खुद से दूर कर दें। तकिए के नीचे फोन रखना आपकी नींद और मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक है। अलार्म के लिए फोन के बजाय एक पारंपरिक टेबल घड़ी का उपयोग करें। अपने घर में एक ‘डिजिटल कर्फ्यू’ का समय तय करें, जिसके बाद फोन छूना मना हो।

सिर्फ ऐप डिलीट करना काफी नहीं: अक्सर हम सोचते हैं कि कुछ ऐप्स डिलीट करने से बात बन जाएगी, लेकिन बोरियत हमें फिर से वहीं ले जाती है। कहीं लाइन में खड़े हों या किसी का इंतज़ार कर रहे हों, फोन निकालने के बजाय एक छोटी किताब या पॉकेट बुक साथ रखें। लोगों और अपने परिवेश को गौर से देखने की आदत डालें, यह आपकी रचनात्मकता को बढ़ाएगा।

डिस्प्ले का आकर्षण कम करें: चमकदार रंगों के प्रति हमारा आकर्षण प्राकृतिक है। अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर स्क्रीन को ‘ग्रेस्केल’ (Grayscale) मोड पर कर दें। जब आपका इंस्टाग्राम या फेसबुक किसी पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट वेबसाइट जैसा दिखने लगेगा, तो आपकी रुचि खुद-ब-खुद कम हो जाएगी। साथ ही, अनावश्यक नोटिफिकेशन्स को बंद कर दें।

ऑफलाइन हॉबीज को दें समय: डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर अपनी पुरानी आदतों जैसे पेंटिंग, संगीत, डांस या किताब पढ़ने को समय दें। खाने की मेज और बाथरूम को ‘नो फोन ज़ोन’ घोषित करें। याद रखें, तकनीक आपकी सुविधा के लिए है, गुलामी के लिए नहीं।

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