शादी के कुछ महीने बाद हुई गिरफ्तारी, अब CAA के आवेदन पर मिली जमानत; बंगाल की इस खबर ने सबको चौंकाया

पश्चिम बंगाल के माथाभांगा में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहाँ नागरिकता संशोधन कानून (CAA) एक महिला के लिए जेल की सलाखों से बाहर आने का जरिया बन गया। बांग्लादेशी नागरिक होने और अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में ६ महीने जेल काट चुकी जबा रानी सरकार आखिरकार बुधवार को अपने घर लौट आईं। कोलकाता उच्च न्यायालय की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने सीएए पोर्टल पर उनके आवेदन के आधार पर उन्हें जमानत दे दी है।

अतीत का संघर्ष: जबा रानी का जन्म बांग्लादेश के लालमुनीरहाट में हुआ था। उनके अनुसार, वहां हिंदू लड़कियों की असुरक्षा को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें ६ साल की उम्र में धूपगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में उनके चाचा के घर छोड़ दिया था। यहीं पली-बढ़ी जबा की शादी २०२४ में सीतलकुची के देबाशीष से हुई। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद पुलिस ने उन्हें घुसपैठ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। पति को एक महीने बाद जमानत मिल गई, लेकिन जबा को अलीपुरद्वार जेल में रहना पड़ा।

कानून और राजनीति: जबा के पति देबाशीष ने हार नहीं मानी और सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया। इस आवेदन के दस्तावेजों को कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ। बीजेपी इसे सीएए की सफलता बता रही है, वहीं टीएमसी इसे कानूनी प्रक्रिया मान रही है। जबा ने रिहा होने के बाद कहा, “इतने सालों बाद मुझे अपनी पहचान और घर वापस मिलने की उम्मीद जगी है।”

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