गोरखाओं के साथ धोखे का आरोप! बीजेपी छोड़ टीएमसी का दामन थामने वाले विष्णु प्रसाद क्या बदलेंगे पहाड़ का गणित?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। कर्सियांग से बीजेपी विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा ने गुरुवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। मंत्री शशि पांजा और ब्रत्य बसु की उपस्थिति में उन्होंने टीएमसी का झंडा थामा। पहाड़ों में बीजेपी के गढ़ को भेदते हुए विष्णु प्रसाद का दलबदल करना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

बीजेपी पर निशाना साधते हुए विष्णु प्रसाद ने कहा, “बीजेपी ने गोरखा भाई-बहनों को सालों तक बेवकूफ बनाया। वे टॉर्च की रोशनी दिखाकर कहते रहे कि यही सूरज है। बीजेपी ने पहाड़ के विकास के लिए कोई काम नहीं किया, जिसके कारण मैं विधायक होने के बावजूद अपने लोगों की सेवा नहीं कर पा रहा था।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी की विकास नीतियों से प्रभावित होकर ही उन्होंने यह फैसला लिया है।

विष्णु प्रसाद २०२१ में अलग उत्तर बंगाल के नारे के साथ चुनाव जीते थे, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा मांगों पर ध्यान न देने से वे नाराज थे। २०२४ के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के खिलाफ निर्दलय चुनाव लड़कर अपने बागी तेवर साफ कर दिए थे। अब सीधे टीएमसी में शामिल होने से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि बीजेपी इसे मामूली घटना बता रही है, लेकिन जानकार मानते हैं कि चुनाव से पहले एक कद्दावर विधायक का जाना पहाड़ों में सत्ता का संतुलन बिगाड़ सकता है।

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