क्या AI खत्म कर देगा भारत का आईटी दबदबा? इंफोसिस और टीसीएस के शेयरों में भारी गिरावट से मचा हड़कंप

भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए फरवरी का महीना किसी बुरे सपने से कम नहीं साबित हो रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा भारतीय आईटी बाजार से डगमगाता दिख रहा है। NSDL की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के पहले 15 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने 10,956 करोड़ रुपये मूल्य के आईटी शेयर बेच दिए हैं। इस बिकवाली के कारण आईटी कंपनियों में विदेशी होल्डिंग पिछले 4 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
गिरावट की असली वजह: जेनरेटिव एआई का खौफ विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी बिकवाली के पीछे ‘जेनरेटिव एआई’ (Generative AI) का डर है। निवेशकों को अंदेशा है कि एआई अब कोडिंग और सॉफ्टवेयर विकास जैसे कामों को इंसानों से बेहतर और तेजी से कर सकता है। भारतीय आईटी कंपनियां बड़े पैमाने पर कोडिंग और सपोर्ट सेवाओं से राजस्व कमाती हैं, और एआई के आने से उनके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बाजार में गिरावट का असर इस बिकवाली का सीधा असर टीसीएस (TCS), इंफोसिस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर भाव पर पड़ा है। इंफोसिस के शेयरों में इस महीने अब तक 16.5% की गिरावट आई है, जबकि टीसीएस और एचसीएल टेक 14% से अधिक गिर चुके हैं। इस मंदी के कारण न केवल विदेशी निवेशकों बल्कि घरेलू म्यूचुअल फंड्स को भी भारी नुकसान हुआ है, जिसका कुल अनुमान लगभग 50,000 करोड़ रुपये लगाया जा रहा है।