ट्रंप के ‘पीस बोर्ड’ में भारत की एंट्री! क्या संयुक्त राष्ट्र को चुनौती दे रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप? गजा पर बड़ी बैठक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्थापित ‘गजा पीस बोर्ड’ की उद्घाटन बैठक में भारत ने पर्यवेक्षक (Observer) देश के रूप में शिरकत की है। वॉशिंगटन डीसी स्थित ‘डोनाल्ड ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय दूतावास की चार्ज द अफेयर्स नामग्या खम्पा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, पहले चरण में भारत इस बोर्ड का हिस्सा नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले व्यक्तिगत निमंत्रण के बाद भारत की इस भागीदारी को वैश्विक कूटनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के समानांतर नई शक्ति? ट्रंप का यह ‘पीस बोर्ड’ अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई विशेषज्ञ इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देख रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह बोर्ड भविष्य में संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर नजर रखेगा और सुनिश्चित करेगा कि वह सही से काम करे। इस बोर्ड के सदस्यों में अर्जेंटीना, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश शामिल हैं। बैठक में यह घोषणा की गई कि नौ सदस्य देश गजा के पुनर्निर्माण के लिए 7 बिलियन डॉलर देंगे, जबकि अमेरिका ने अकेले 10 बिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है।

गजा का पुनर्निर्माण और सैन्य तैनाती: युद्ध से तबाह हो चुके गजा को फिर से बसाने के लिए लगभग 70 बिलियन डॉलर की जरूरत है। ट्रंप की 20-सूत्रीय योजना के तहत पांच देश इस क्षेत्र में ‘अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल’ के रूप में अपनी सेना भेजने के लिए भी तैयार हो गए हैं। ट्रंप ने सहयोगियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहाँ खर्च किया गया हर डॉलर भविष्य में शांति के लिए निवेश होगा। हालांकि, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली जैसे देशों ने फिलहाल सदस्य बनने के बजाय भारत की तरह पर्यवेक्षक बने रहने का फैसला किया है।

ईरान को ‘लास्ट वार्निंग’: इस बैठक के दौरान ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने मध्य पूर्व में दशकों की सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य तैनाती का आदेश दिया है। ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि यदि उसने परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण और हिजबुल्लाह या हमास जैसे समूहों को वित्तीय मदद देना बंद नहीं किया, तो उसे अमेरिकी सेना के सीधे हमले का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप के इस रुख ने खाड़ी देशों में तनाव को एक नए चरम पर पहुंचा दिया है।

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