बांकुरा में हाहाकार! पर्याप्त बारिश के बाद भी बोरो खेती को नहीं मिलेगा पानी, संकट में लाखों किसान

दक्षिण बंगाल में पिछले मानसून के दौरान रिकॉर्ड बारिश हुई थी, जिससे मुकुटमणिपुर जलाशय लबालब भर गया था। लेकिन अब सिंचाई विभाग के एक नए फरमान ने बांकुरा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर और हुगली जिले के लाखों किसानों की नींद उड़ा दी है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रबी फसलों के लिए तो पानी दिया जाएगा, लेकिन बोरो धान की खेती के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। इस आदेश से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

आंकड़ों के अनुसार, बांकुरा की ८५,२२० एकड़ और पश्चिम मेदिनीपुर की लगभग ३০,००० एकड़ जमीन सहित अन्य जिलों की लाखों एकड़ भूमि बोरो खेती पर निर्भर है। कई किसानों ने पहले ही फसल लगा दी है, लेकिन अब पानी की कमी के कारण फसल के बर्बाद होने का डर सता रहा है। सिंचाई विभाग का तर्क है कि जलाशय का जलस्तर फिलहाल ४२१ फीट पर आ गया है। रबी सीजन की अगली दो किस्तों में पानी छोड़ने के बाद बांध में इतना पानी नहीं बचेगा कि बोरो की खेती को सहारा दिया जा सके।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। भाजपा और वामदलों ने राज्य सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार किसानों को ‘भते मारना’ (भूखा मारना) चाहती है। विपक्ष का कहना है कि मानसून में भारी बारिश के बावजूद पानी का सही संचयन क्यों नहीं किया गया? वहीं, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को चुनावी राजनीति करार दिया है। बांकुरा जिला परिषद ने मामले की जांच कर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसानों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही है।

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