बंगाली साहित्य के एक युग का अंत! ‘चौरंगी’ के लेखक मणिशंकर मुखोपाध्याय (शंकर) का निधन

बंगाल के साहित्य प्रेमियों के लिए आज एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर बंगाली लेखक मणिशंकर मुखोपाध्याय, जिन्हें दुनिया ‘शंकर’ के नाम से जानती थी, अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार दोपहर 1 बजे कोलकाता के एक अस्पताल में 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।
साहित्य में योगदान: शंकर का जन्म 1933 में बांग्लादेश के जेसोर में हुआ था। उनकी पहली ही किताब ‘कतो अजानारे’ ने उन्हें रातों-रात मशहूर कर दिया था। उनकी सबसे चर्चित कृति ‘चौरंगी’ आज भी पाठकों की पसंदीदा है। महान निर्देशक सत्यजीत रे ने उनकी कहानियों पर आधारित ‘सीमाबद्ध’ और ‘जन अरण्य’ जैसी फिल्में बनाईं। उनकी लेखनी ने बंगाली मध्यमवर्गीय जीवन और शहर की हलचल को एक अलग पहचान दी थी।
एक अपूरणीय क्षति: हाल ही में गिरने के कारण उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई थी, जिसके बाद से वे अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन पर साहित्य और सिनेमा जगत की हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। ‘चरण छुए जाई’ और ‘नगर नंदिनी’ जैसे उनके प्रसिद्ध ग्रंथ हमेशा पाठकों के दिलों में बसे रहेंगे।