सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस काफी नहीं! मेडिकल इमरजेंसी फंड क्यों है जरूरी? एक्सपर्ट्स की सलाह

स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) एक सुरक्षा कवच है, लेकिन किसी भी चिकित्सा आपातकाल के पूर्ण वित्तीय झटके को संभालने के लिए यह अकेला पर्याप्त नहीं है। इसीलिए वित्तीय सलाहकार अब स्वास्थ्य बीमा के साथ-साथ एक अलग “इमरजेंसी मेडिकल फंड” बनाने की सलाह दे रहे हैं।

सिर्फ बीमा पर निर्भर रहना जोखिम भरा क्यों? अस्पताल के बिल में कई ऐसे ‘कंज्यूमेबल्स’ (जैसे ग्लव्स, मास्क) होते हैं जिनका खर्च बीमा कंपनियां नहीं उठातीं। इसके अलावा, कई पॉलिसियों में ‘को-पेमेंट’ और रूम रेंट पर सब-लिमिट होती है, जिससे बिल का १०% से २०% हिस्सा खुद ही भरना पड़ता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि आपात स्थिति में नॉन-नेटवर्क अस्पताल में जाना पड़े, तो पहले खुद पैसे चुकाने पड़ते हैं और बाद में प्रतिपूर्ति (Reimbursement) मिलती है। ऐसे समय में इमरजेंसी फंड ही आपको कर्ज लेने से बचाता है।

कैसे बनाएं यह फंड? यह फंड आपके ६ से १२ महीने के घरेलू खर्च के बराबर होना चाहिए। इसे सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड म्यूचुअल फंड जैसे सुलभ निवेश में रखें ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके। संक्षेप में, बीमा आपको सुरक्षा देता है, लेकिन मेडिकल फंड आपके निवेश और भविष्य की बचत को सुरक्षित रखता है।

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