सीजेआई सूर्य कांत का सख्त रुख: बिना डेटा के नहीं मिलेगा कोटा! पसमांदा आरक्षण मामले में केंद्र को बड़ी राहत

पसमांदा मुस्लिमों (Pasmanda Muslims) के लिए अलग आरक्षण की मांग करने वाली एक याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। वकील अंजना प्रकाश ने रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ओबीसी (OBC) कोटे के तहत पसमांदाओं के लिए १० प्रतिशत आरक्षण की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा, “आपके पास डेटा कहां है? आप यह कैसे साबित करेंगे कि केवल पसमांदा ही पिछड़े हैं?” अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वे अन्य गरीब मुस्लिमों की कीमत पर केवल पसमांदाओं को ही आगे क्यों बढ़ाना चाहते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि आरक्षण जैसे गंभीर संवैधानिक मुद्दे पर बिना पुख्ता दस्तावेजों और आर्थिक आंकड़ों के कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।

याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले को आंध्र प्रदेश के ४% मुस्लिम आरक्षण वाले केस के साथ जोड़ने की मांग की गई, जो फिलहाल संवैधानिक पीठ के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इसके लिए इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को अपना पक्ष मजबूत करने के लिए ४ हफ्ते का समय दिया है। चूंकि भाजपा पिछले कुछ वर्षों से पसमांदा मुस्लिमों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, ऐसे में इस कानूनी लड़ाई के राजनीतिक मायने काफी गहरे माने जा रहे हैं।

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