संबंध बनाने के बाद ‘कुंडली’ का बहाना? शादी का झांसा देने वालों को दिल्ली हाईकोर्ट की कड़ी चेतावनी!

दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘शादी के झूठे वादे’ और ‘कुंडली’ के बहाने रिश्ते से पीछे हटने के मामले में एक ऐतिहासिक टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में ‘कुंडली नहीं मिल रही’ जैसा बहाना बनाकर पीछे हट जाता है, तो यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत एक दंडनीय अपराध माना जा सकता है।
मामला एक ऐसे जोड़े का है जो लगभग आठ साल से रिश्ते में थे। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने 2018 से उसे लगातार शादी का आश्वासन दिया और कहा कि ज्योतिषीय मिलान जैसी कोई बाधा नहीं आएगी। इसी भरोसे के आधार पर उनके बीच शारीरिक संबंध बने। लेकिन जनवरी 2026 में, आरोपी ने अचानक कुंडली न मिलने का तर्क देते हुए शादी से इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस व्यवहार को प्रथम दृष्टया ‘धोखाधड़ी’ माना है।
अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि व्यक्तिगत विश्वास या कुंडली का बहाना तब तक मान्य नहीं है जब तक कि यह साबित न हो जाए कि शादी का इरादा शुरुआत से ही नेक था। नए कानून (BNS 69) के तहत, धोखाधड़ी के माध्यम से बनाए गए शारीरिक संबंधों के लिए अधिकतम 10 साल की कैद का प्रावधान है। कोर्ट ने संदेश दिया है कि धार्मिक मान्यताओं का उपयोग किसी की भावनाओं और शरीर के साथ खिलवाड़ करने के लिए नहीं किया जा सकता। यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो कुंडली को कानूनी सुरक्षा कवच समझते हैं।