खुशखबरी! बंगाल के स्कूलों में फिर बंटेंगी साइकिलें, मुख्यमंत्री ने दी नए चरण को हरी झंडी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के स्कूली छात्रों के लिए एक बार फिर सौगातों का पिटारा खोल दिया है। २०२६ के विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले, राज्य सरकार ने लगभग १३ लाख (१२.५६ लाख) छात्र-छात्राओं को मुफ्त साइकिल देने का एक बड़ा निर्णय लिया है। यह लाभ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के साथ-साथ मदरसों के नौवीं कक्षा के छात्रों को दिया जाएगा।

योजना का दायरा और बजट प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ‘सबुज साथी’ योजना के इस नए चरण के तहत कुल १२ लाख ५६ हजार साइकिलें वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए राज्य सरकार लगभग ५०७ करोड़ रुपये खर्च करेगी। पश्चिम बंगाल अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण और वित्त निगम (WBSCSTOBCDFC) को इन साइकिलों की खरीद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग ने पहले ही १५ लाख साइकिलों की खरीद के लिए निविदा (Tender) प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि समय रहते इन्हें ब्लॉक स्तर तक पहुंचाया जा सके।

ऐतिहासिक सफलता और वैश्विक सम्मान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की दूरदर्शी सोच के साथ २०१५-१६ में इस योजना की शुरुआत हुई थी। खास बात यह है कि ‘सबुज साथी’ का लोगो खुद मुख्यमंत्री ने डिजाइन किया है, जो हर साइकिल की टोकरी पर लगा होता है। अब तक राज्य के १.४४ करोड़ से अधिक छात्र इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इस परियोजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे यूनिसेफ और संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व स्तरीय ‘WSIS Award’ से सम्मानित किया जा चुका है।

चुनावी तत्परता और प्रशासनिक सक्रियता राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि २०२६ के विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार इस वितरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। नबन्ना ने फरवरी के भीतर ही अधिकांश साइकिलों का वितरण समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश भेज दिए गए हैं। वर्तमान में राज्य के लगभग ९,००० स्कूल इस योजना के दायरे में आते हैं।

उद्देश्य और सामाजिक प्रभाव इस योजना का मुख्य उद्देश्य माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले (Dropout) छात्रों की संख्या में कमी लाना और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को स्कूल के प्रति प्रोत्साहित करना है। ‘सबुज साथी’ ने ग्रामीण बंगाल में परिवहन व्यवस्था में क्रांति ला दी है, जिससे छात्राओं के आत्मविश्वास और गतिशीलता में भारी वृद्धि हुई है। यह केवल एक साइकिल नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा की ओर बढ़ते छात्रों के सपनों का एक जरिया बन गई है।

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