बंगाल वोटर लिस्ट विवाद: झारखंड और ओडिशा से आएंगे जज, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कसी कमर

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (Voter List) में सुधार और गड़बड़ियों को दूर करने के लिए चल रहा ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अब निर्णायक मोड़ पर है। गुरुवार को कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा झारखंड और ओडिशा से आने वाले न्यायिक अधिकारियों का स्वागत और उन्हें मिलने वाला सहयोग था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, बंगाल की मतदाता सूची में मौजूद विसंगतियों की जांच का जिम्मा जजों को सौंपा गया है। काम का बोझ अधिक होने के कारण अब पड़ोसी राज्यों के जजों की मदद ली जा रही है। बैठक में चुनाव आयोग के प्रतिनिधि सुब्रत गुप्ता ने स्पष्ट किया कि हालांकि बाहरी जजों के आने की तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन उनके आते ही राज्य प्रशासन उन्हें रहने, खाने और तकनीकी सहायता के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय:
- बंगाल के शेष सभी न्यायिक अधिकारियों की डिजिटल आईडी आज शाम तक तैयार कर ली जाएगी।
- 14 फरवरी तक प्राप्त सभी दस्तावेजों को शुक्रवार तक पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।
- चुनाव आयोग हर दिन विधानसभावार प्रगति रिपोर्ट सीधे कोलकाता हाईकोर्ट को सौंपेगा।
वोटर लिस्ट के प्रकाशन की अंतिम तिथि आगामी शनिवार (28 फरवरी) तय की गई है। हालांकि, इतने कम समय में लाखों दस्तावेजों का सत्यापन करना एक बड़ी चुनौती है। मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि चुनाव से पहले एक पारदर्शी और त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार की जा सके। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग शनिवार को कितनी सूची जारी कर पाता है।