NCERT की किताब पर सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा! ‘न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश’, किताब हुई बैन!

एनसीईआरटी (NCERT) की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से संबंधित एक अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने की एक ‘गहरी साजिश’ करार दिया है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को विवादित किताब पर तुरंत प्रतिबंध लगाने और इसके ऑनलाइन पीडीएफ संस्करण को हटाने का आदेश जारी किया है।

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत ने केंद्र सरकार और एनसीईआरटी को फटकार लगाते हुए कहा, “संस्थान का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसा लगता है कि यह सब जानबूझकर न्यायपालिका को कमतर दिखाने के लिए किया गया है।” जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से बिना शर्त माफी मांगी, तो मुख्य न्यायाधीश ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उन्होंने गोलियां चलाई हैं और आज न्यायपालिका लहूलुहान है।” कोर्ट ने कहा कि एनसीईआरटी के माफीनामे में ‘क्षमा’ शब्द का उल्लेख तक नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कुछ अधिकारियों को काम से हटा देना काफी नहीं है, बल्कि इस ‘साजिश’ की तह तक जाना जरूरी है। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि बाजार से ३২ किताबें वापस ले ली गई हैं, लेकिन कोर्ट ने पूरी जांच रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई ११ मार्च को होगी।

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