बंगाल में SIR पीड़ितों को नौकरी का मरहम! ५६ परिवारों को रोजगार, विपक्ष ने नौकरी की स्थिरता पर उठाए सवाल!

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच ममता बनर्जी सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। गुरुवार को नवान्न में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि SIR प्रक्रिया के दौरान जिन ५६ लोगों की मृत्यु हुई, उनके परिवार के एक सदस्य को राज्य सरकार नौकरी देगी।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राज्य में भारी तनाव देखा गया था। एक आत्महत्या से शुरू हुआ यह सिलसिला ५६ मौतों तक जा पहुँचा। कई परिवारों और सत्ता पक्ष का आरोप था कि मतदाता सूची से नाम कटने के डर ने इन लोगों की जान ले ली। अब राज्य सरकार इन ५६ परिवारों के साथ-साथ गंभीर उत्पीड़न का शिकार हुए अन्य ५ परिवारों के सदस्यों को ‘होम गार्ड’ के पद पर नियुक्त करने जा रही है। जिलावार सूची तैयार कर ली गई है और जल्द ही नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे।
हालांकि, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले को ‘अनिश्चितता’ से भरा बताया है। उन्होंने इस नौकरी की तुलना ‘आधी दाढ़ी बनाने’ से करते हुए कहा कि होम गार्ड की नौकरी में न तो कोई पेंशन है और न ही ग्रेच्युटी। उन्होंने दावा किया कि इन नौकरियों को हर साल रिन्यू करना पड़ता है और सरकार अक्सर ऐसा नहीं करती। अधिकारी ने १५ हजार सिविक वालंटियर्स का हवाला देते हुए कहा कि यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। चुनाव से पहले इस फैसले ने राज्य में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।