तमिलनाडु की राजनीति में ‘भूकंप’! स्टालिन के साथ आए जयललिता के सबसे भरोसेमंद पन्नीरसेल्वम

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। जयललिता के सबसे वफादार सिपाही और तमिलनाडु के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) ने शुक्रवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की सदस्यता ग्रहण कर ली। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की मौजूदगी में पन्नीरसेल्वम का डीएमके में शामिल होना अन्नाद्रमुक (AIADMK) के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

जयललिता के निधन के बाद से ही एआईएडीएमके के भीतर वर्चस्व की जंग जारी थी। एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के साथ लंबे विवाद और कानूनी लड़ाई के बाद पन्नीरसेल्वम पार्टी में अलग-थलग पड़ गए थे। पलानीस्वामी ने उनके लिए पार्टी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए थे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि ओपीएस अपनी नई पार्टी बनाएंगे, लेकिन उन्होंने सबको चौंकाते हुए अपने धुर विरोधी स्टालिन के साथ हाथ मिला लिया।

शुक्रवार को चेन्नई स्थित डीएमके मुख्यालय ‘अन्ना अरिवालयम’ में पन्नीरसेल्वम का भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर उन्होंने मुख्यमंत्री स्टालिन की तारीफ करते हुए कहा कि राज्य के विकास के लिए स्टालिन का नेतृत्व अनिवार्य है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ओपीएस के इस कदम से दक्षिण तमिलनाडु के ‘थेवर’ समुदाय के वोट बैंक पर गहरा असर पड़ेगा, जिससे डीएमके को आगामी चुनावों में बड़ी बढ़त मिल सकती है। जयलলিতা की विरासत का दावा करने वाले नेता का डीएमके में जाना द्रविड़ राजनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत है।

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