केजरीवाल की मुश्किलें फिर बढ़ीं! निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची सीबीआई

दिल्ली के कथित आबकारी नीति घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में निचली अदालत द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को सीबीआई (CBI) ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई ९ मार्च को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच में होने की उम्मीद है।

क्या था निचली अदालत का फैसला? राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य २१ आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि जांच एजेंसी उनके खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने कहा था कि केजरीवाल को ‘मुख्य साजिशकर्ता’ बताने के लिए पर्याप्त तथ्य नहीं हैं। हालांकि, सीबीआई इस फैसले से संतुষ্ট नहीं है और उसका मानना है कि कई अहम गवाहों और सबूतों को नजरअंदाज किया गया है।

विवाद की जड़: नई आबकारी नीति यह पूरा विवाद नवंबर २०२१ में लागू हुई नई आबকারী नीति से शुरू हुआ था। केजरीवाल सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए शराब की दुकानों का निजीकरण करने का फैसला किया था। लेकिन लाइसेंस वितरण में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद ८ महीने के भीतर ही इसे वापस ले लिया गया। एलजी विनय कुमार सक्सेना की सिफारिश पर इस मामले की जांच सीबीआई और ईडी को सौंपी गई थी।

अब ९ मार्च की तारीख ‘आम आदमी पार्टी’ के भविष्य के लिए बेहद अहम होने वाली है। क्या हाई कोर्ट निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखेगा या फिर से शुरू होगी कानूनी कार्यवाही? देश की नजरें अब उच्च न्यायालय पर टिकी हैं।

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