बंगाल में ‘बाबरी’ पर संग्राम! अमित शाह का ममता पर बड़ा हमला—’साजिश के तहत बन रही मस्जिद’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ की आहट के साथ ही राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। विशेष रूप से भरतपुर के विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण की घोषणा ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। आज रायदिघी में ‘परिवर्तन यात्रा’ के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जमकर घेरा। शाह ने आरोप लगाया कि बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति के तहत यह सब एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।

अमित शाह का तीखा प्रहार: अमित शाह ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, “हुमायूं और ममता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” उन्होंने दावा किया कि हुमायूं कबीर को जानबूझकर योजनाबद्ध तरीके से तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बाहर निकाला गया है ताकि बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण का मुद्दा उठाया जा सके और धार्मिक ध्रुवीकरण किया जा सके। शाह ने जनता से सीधा सवाल किया, “क्या आपके बंगाल में फिर से बाबरी मस्जिद बननी चाहिए? यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है।”

क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत दिसंबर २०२५ में हुई थी, जब हुमायूं कबीर ने ६ दिसंबर को घोषणा की थी कि वह बेलडांगा में बाबरी मस्जिद बनाएंगे। ६ दिसंबर वही तारीख है जब अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराया गया था। उस समय कबीर टीएमसी के विधायक थे। उनके इस बयान से राज्य में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। टीएमसी नेतृत्व ने इसे निजी बयान बताते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

कबीर की नई राह और २०२६ का लक्ष्य: पार्टी के भीतर खींचतान के बाद, टीएमसी ने हुमायूं कबीर को सस्पेंड कर दिया। इसके तुरंत बाद कबीर ने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान किया। उनका लक्ष्य २०२६ के चुनाव में ९० सीटों पर जीत हासिल करना है। उनका मानना है कि यदि सरकार बनाने की ‘चाबी’ उनके हाथ में होगी, तभी वह मस्जिद का निर्माण सुनिश्चित कर पाएंगे।

राजनीतिक समीकरण: टीएमसी का आरोप है कि हुमायूं कबीर बीजेपी के साथ मिलकर मुस्लिम वोटों को काटने का काम कर रहे हैं। हालांकि, अमित शाह ने आज इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सीधे ममता बनर्जी पर निशाना साधा। शाह ने कहा कि यह सब ममता सरकार की शह पर हो रहा है ताकि विशेष वोट बैंक को साधा जा सके। बंगाल चुनाव से पहले ‘बाबरी’ के नाम पर शुरू हुई यह राजनीति अब सत्ता के गलियारों में हलचल मचा रही है।

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