ईरान की आग भारत पहुंची! श्रीनगर की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, अयातुल्ला के लिए ‘मातम’ और आक्रोश

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने जम्मू-कश्मीर में भारी हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी और इजरायली हमले में खामेनेई की शहादत की खबर फैलते ही पूरी घाटी विरोध प्रदर्शनों से सुलग उठी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे कश्मीर में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं और अगले दो दिनों के लिए स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया है।
घाटी में मातम और विरोध प्रदर्शन रविवार सुबह से ही श्रीनगर के लाल चौक, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा जैसे इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में काले झंडे और खामेनेई की तस्वीरें थीं। नौहाख्वानी (शोक गीत) और मातम के साथ लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों की भी बड़ी भागीदारी देखी गई। सुरक्षा बलों को डर है कि यह जनसैलाब कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
प्रशासनिक पाबंदियां और हाई अलर्ट कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की शांति की अपील के बावजूद तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने सोमवार को आवाजाही पर कई प्रतिबंध लगा दिए हैं। श्रीनगर के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। अधिकारियों के अनुसार, अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट बंद करना जरूरी था। अगले 48 घंटों तक स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
देश के अन्य हिस्सों में भी असर खामेनेई की मौत का असर सिर्फ कश्मीर तक सीमित नहीं है। कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले के अलीपुरा गांव में तीन दिवसीय शोक की घोषणा की गई है। वहां की मस्जिदों में विशेष प्रार्थना सभाएं हो रही हैं और लोगों ने स्वेच्छा से दुकानें बंद रखी हैं। उत्तर प्रदेश और लद्दाख में भी शिया समुदाय के लोगों ने भारी संख्या में निकलकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की है।
विदेश मंत्रालय के साथ संपर्क में सरकार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रशासन संयम बरत रहा है ताकि शांतिपूर्ण तरीके से शोक मनाया जा सके। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क बनाया जा रहा है। मध्य पूर्व के इस युद्ध ने भारत के भीतर भी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ईरान के प्रति गहरी धार्मिक सहानुभूति है।