ईरान-इजरायल युद्ध का त्रिपुरा में हाहाकार! पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भारी भीड़, क्या खत्म होने वाला है तेल?

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध की तपिश अब त्रिपुरा तक पहुंच गई है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने राज्य में ईंधन संकट का गहरा डर पैदा कर दिया है। जैसे ही यह खबर फैली कि ईरान ने हॉर्मुज जलডमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, त्रिपुरा के लोग सड़कों पर उतर आए। अगरतला सहित राज्य के तमाम जिलों में पेट्रोल और डीजल के लिए पंपों पर किलोमीटर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं।
मंगलवार सुबह से ही लोग अपने वाहनों के साथ पेट्रोल पंपों के बाहर खड़े नजर आए। स्थिति तब और बिगड़ गई जब लोग डर के मारे ड्रम और कैन में अतिरिक्त पेट्रोल भरने लगे। सোনামुड़ा और विशालगढ़ जैसे इलाकों में तेल को लेकर आम जनता के बीच तीखी झड़पें भी हुईं, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। इस अफरातफरी का फायदा उठाकर कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ गया है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए त्रिपुरा के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुशांत चौधरी ने आज एक महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने इंडियन ऑयल के अधिकारियों और पेट्रोल पंप मालिकों के साथ चर्चा के बाद मीडिया को संबोधित किया। मंत्री ने कहा, “राज्य में घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हमारे पास एक महीने का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।” उन्होंने जनता से अपील की कि वे ‘पैनिक बाइंग’ न करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वैश्विक स्तर पर देखें तो ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 13 फीसदी तक उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश के पास वर्तमान में लगभग 25 दिनों का रणनीतिक और वाणिज्यिक तेल भंडार शेष है। अगर युद्ध जल्द नहीं रुका, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
वहीं, सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों ने दुनिया को चौंका दिया है। सऊदी अरब की दिग्गज तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ की ‘रास तनुरा’ रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन हमले के निशान साफ देखे जा सकते हैं। यह रिफाइनरी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल केंद्रों में से एक है। हमले के बाद रिफाइनरी में लगी आग और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि सऊदी अरब से निर्यात प्रभावित होता है, तो भारत जैसे देशों में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। त्रिपुरा में दिख रही लंबी कतारें इसी वैश्विक अस्थिरता का सीधा परिणाम हैं।