बंगाल में SIR का कोहराम! नागरिकता के लिए आवेदनों की बाढ़, केंद्र सरकार ने अचानक लिया बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल में ‘स्टेट इन्वेंटरी ऑफ रेजिडेंस’ (SIR) को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। SIR की अंतिम सूची आने के बाद नागरिकता पाने के लिए आवेदनों की भारी संख्या को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य में दो और नई समितियां गठित करने का निर्णय लिया है। बंगाल में पहले से ही दो समितियां कार्यरत थीं, लेकिन आवेदकों की बढ़ती भीड़ के कारण अब इनकी कुल संख्या चार हो जाएगी।

SIR लिस्ट में नाम कटने या ‘पेंडिंग’ रहने के कारण सबसे ज्यादा आक्रोश मतुआ समुदाय के बीच देखा जा रहा है। मतुआ बहुल इलाकों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीधा हमला बोलते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने CAA का विरोध करके शरणार्थियों का नुकसान किया है। अगर वे विरोध न करतीं, तो अब तक सभी हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता मिल गई होती।” शाह ने यह भी भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार के रहते किसी भी हिंदू शरणार्थी की नागरिकता नहीं जाएगी और घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

दूसरी ओर, सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने इसे केंद्र का ‘चुनावी स्टंट’ करार दिया है। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “यह लोगों को बीच मझधार में धकेल कर किनारे पर गोताखोर खड़े करने जैसा है। जो लोग सालों से वोट दे रहे हैं, वे पहले से ही नागरिक हैं। कमेटियां बनाकर उन्हें भ्रमित किया जा रहा है।” टीएमसी का आरोप है कि चुनाव से पहले लोगों को परेशान करने के लिए यह सब किया जा रहा है।

इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ६ मार्च को कोलकाता के धर्मतला में धरने पर बैठने का ऐलान किया है। SIR के मुद्दे पर ममता बनर्जी का यह आंदोलन केंद्र की नीतियों के खिलाफ एक बड़ी जंग का संकेत दे रहा है। राज्य की जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र की नई कमेटियां आवेदनों का निपटारा कैसे करती हैं और ममता बनर्जी अपने धरने से क्या संदेश देती हैं।

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