ईंधन संकट पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन: सप्लाई और कीमतों को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय ने जारी किया बयान

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग में अब कई देशों के शामिल होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में खलबली मची है। इस बीच, भारत सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि देश के पास वर्तमान में लगभग २५ दिनों का कच्चा (Crude) और रिफाइंड तेल का भंडार मौजूद है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSU) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। सरकारी सूत्रों के अनुसार, युद्ध की इस स्थिति के बावजूद सरकार की फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। मंत्रालय स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रख रहा है ताकि देश में ईंधन की आपूर्ति बाधित न हो।

भारत अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। वर्तमान संकट को देखते हुए, भारत ने कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के लिए वैकल्पिक देशों की तलाश शुरू कर दी है। वाणिज्य मंत्रालय ने भी एक बैठक कर शिपिंग रूट्स में बदलाव, बढ़ते बीमा खर्च और कंटेनरों की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा की है। सूत्रों का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीदने के विकल्प को भी खुला रख रहा है, ताकि घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखा जा सके। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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