हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से मचा हाहाकार, क्या भारत में खत्म होगा पेट्रोल? जानिए क्या है सरकारी तैयारी

ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा ‘प्लान-बी’ तैयार कर लिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग के बंद होने के बाद भारत की तेल आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने का फैसला किया है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास वर्तमान में १० से १५ दिनों का कच्चा तेल भंडार मौजूद है, जो किसी भी अल्पकालिक संकट से निपटने के लिए पर्याप्त है।

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के बाद स्थिति तेजी से बदली है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का २०% तेल गुजरता है, उसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें १३% उछलकर ८२ डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। हालांकि, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि इस बंद का भारत पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। भारत के पास अपनी रिफाइनरियों और ट्रांजिट में पर्याप्त स्टॉक है, जो देश की ७ से १० दिनों की ईंधन जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकता है।

सरकार की रणनीति यह है कि यदि ईरान संकट लंबा खिंचता है, तो भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे देशों से तेल खरीदेगा। लेकिन सबसे प्रभावी रणनीति रूस के साथ ‘क्रूड ऑयल बायबैक’ की होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भले ही वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ रही हों, लेकिन भारत सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहें। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से तैयार है और किसी भी आपात स्थिति के लिए उसके पास रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) सुरक्षित हैं।

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