SIR फाइनल लिस्ट के बाद मतुआ समुदाय में भारी गुस्सा, नागरिकता बचाने के लिए केंद्र ने बढ़ाई अपनी ताकत

पश्चिम बंगाल में ‘स्टेट इन्वेंटरी ऑफ रेजिडेंट्स’ (SIR) को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में भारतीय नागरिकता के लिए बढ़ते आवेदनों को देखते हुए केंद्र ने दो और नई समितियां (Committees) गठित करने का निर्णय लिया है। बंगाल में पहले से ही दो समितियां काम कर रही थीं, लेकिन आवेदनों की भारी संख्या के कारण अब इनकी कुल संख्या चार हो गई है।
मतुआ समुदाय की चिंता और सियासत: SIR की अंतिम सूची जारी होने के बाद से विशेष रूप से मतुआ समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना है। कई लोगों के नाम सूची से बाहर होने या ‘विचाराधीन’ होने के कारण नागरिकता के लिए आवेदनों का अंबार लग गया है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि हिंदू शरणार्थियों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने ममता सरकार पर तुष्टिकरण और घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
तृणमूल का पलटवार: टीएमसी नेता कुणाल घोष ने केंद्र के इस कदम को ‘चुनावी स्टंट’ बताया है। उन्होंने कहा कि जो लोग दशकों से वोट दे रहे हैं, उनकी नागरिकता पर सवाल उठाना गलत है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मुद्दे पर 6 मार्च को कोलकाता के धर्मतला में धरने पर बैठने वाली हैं। बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से नागरिकता और SIR के इर्द-गिर्द सिमट गई है।