तेल भंडारों पर हमला बर्दाश्त नहीं! ईरान युद्ध के बीच पुतिन की कड़ी चेतावनी, सऊदी और कतर की सुरक्षा के लिए उतरे मैदान में

मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया है। इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मोर्चा संभाल लिया है। मंगलवार को क्रेमलिन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पुतिन खाड़ी देशों (सऊदी अरब और कतर) की तेल रिफाइनरियों और बुनियादी ढांचे पर ईरानी हमलों को लेकर बेहद चिंतित हैं और वे अपनी यह चिंता सीधे तेहरान तक पहुंचाएंगे।
सऊदी और कतर के साथ पुतिन की अहम बातचीत क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बताया कि पुतिन ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से फोन पर बात की है। सऊदी अरब और कतर को डर है कि ईरान के हमलों से उनके नागरिक सुरक्षित नहीं हैं और उनके तेल भंडार तबाह हो सकते हैं। क्राउन प्रिंस का मानना है कि रूस इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है क्योंकि ईरान और खाड़ी देशों, दोनों के साथ पुतिन के अच्छे संबंध हैं।
वैश्विक तेल संकट: आसमान छू रही कीमतें ईरानी हमलों के कारण सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी को बंद करना पड़ा है। वहीं, कतर के रास लाफान ऊर्जा केंद्र पर हमले के बाद एलएनजी का उत्पादन रुक गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तेल केंद्रों में भी आग लगने की खबरें हैं। इसके कारण कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में भारी उछाल आया है। दुबई और अबू धाबी के हवाई मार्ग बंद होने से अंतरराष्ट्रीय परिवहन पूरी तरह ठप पड़ गया है।
पुतिन ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका और इजरायल की आक्रामक नीतियों ने ही पश्चिम एशिया को इस आग में झोंका है। ईरानी नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान के पलटवार ने स्थिति को बेकाबू कर दिया है। पुतिन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन ने यह दुखद स्थिति पैदा की है। अब दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या पुतिन की मध्यस्थता से खाड़ी देशों के तेल भंडार सुरक्षित रह पाएंगे या जंग और भीषण होगी।