रोजगार के लिए योगी सरकार का बड़ा एक्शन: ट्रेनिंग संस्थानों को मिला ‘टारगेट’, युवाओं को मिलेगी इंडस्ट्री बेस्ड स्किल

प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन (UPSDM) ने अब राज्य के ट्रेनिंग पार्टनर्स (ITPs) के लिए सेक्टर के अनुसार लक्ष्य (Target) तय कर दिए हैं। नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NSDC) योजना के तहत उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सीधे तौर पर बाजार की मांग के अनुसार तैयार करना है ताकि प्रशिक्षण के तुरंत बाद उन्हें नौकरी मिल सके।

इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से ट्रेनिंग योगी सरकार ने इस बार ट्रेनिंग संस्थानों को उनकी पुरानी परफॉर्मेंस के आधार पर जिम्मेदारी सौंपी है। उदाहरण के तौर पर, वेलस्पन लिविंग लिमिटेड को बरेली में अपैरल सेक्टर के लिए 200 युवाओं को तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं, रेमंड जैसे प्रतिष्ठित संस्थान लखनऊ में टेलरिंग की ट्रेनिंग देंगे। जालोन में हेल्थकेयर और अपैरल दोनों क्षेत्रों में प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस तरह की सेक्टर-विशिष्ट ट्रेनिंग से उद्योगों को कुशल कार्यबल मिलेगा और युवाओं को रोजगार।

600 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग और निगरानी इस कौशल विकास कार्यक्रम के तहत ट्रेनिंग की अधिकतम अवधि 600 घंटे तय की गई है। आवासीय केंद्रों में प्रतिदिन कम से कम 8 घंटे की ट्रेनिंग अनिवार्य है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सेक्टर स्किल काउंसिल द्वारा परीक्षा ली जाएगी। ट्रेनिंग लेने वालों की उपस्थिति और डेटा को NSDC पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई सरकार ने ट्रेनिंग पार्टनर्स को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि काम में कोई अनियमितता पाई गई या तय समय में टारगेट पूरा नहीं हुआ, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वेरिफिकेशन के बाद ही सरकारी अनुदान जारी किया जाएगा। योगी सरकार की यह नीति उत्तर प्रदेश को एक ‘स्किल हब’ के रूप में विकसित करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

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