तेल संकट का डर: भारत के पास है 74 दिनों का बैकअप, क्या फिर से रूस बनेगा संकटमोचक?

मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते संघर्ष ने तेल की वैश्विक सप्लाई को बाधित कर दिया है। इस संकट के बीच भारत में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि देश के पास आखिर कितने दिनों का तेल भंडार सुरक्षित है।

74 दिनों का सुरक्षा चक्र सरकारी सूत्रों और समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में लगभग 25 दिनों का कच्चा तेल और 25 दिनों का रिफाइंड ईंधन (पेट्रोल-डीजल) उपलब्ध है। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा और हालिया बैठकों में स्पष्ट किया है कि भारत के पास अपने सामरिक तेल भंडार (Strategic Reserves) और रिफाइनरियों के स्टॉक को मिलाकर कुल 74 दिनों का पर्याप्त बैकअप मौजूद है।

सप्लाई के लिए नए रास्तों की तलाश भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से आधा हिस्सा हॉर्मुज के रास्ते आता है। इस मार्ग के बंद होने से इराक, सऊदी अरब और यूएई से आने वाली सप्लाई पर असर पड़ा है। सोमवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में हरदीप सिंह पुरी ने अधिकारियों को वैकल्पिक रास्तों और रूस, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिका जैसे अन्य स्रोतों से तेल मंगाने की संभावनाओं पर काम करने का निर्देश दिया है।

फिलहाल नहीं बढ़ेंगे दाम सरकार ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें $85 के पार जाने के बावजूद, फिलहाल घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। मंत्रालय ने स्थिति पर नजर रखने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है।

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