शांतिनिकेतन बसंतोत्सव 2026: आर्काइव की तस्वीरों से सजेगा मंच, जीवित होगी सदियों पुरानी विरासत

इस साल शांतिनिकेतन का बसंतोत्सव कला और संस्कृति के प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित नाटक ‘नटीर पूजा’ (Natir Puja) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसे एक नए और ऐतिहासिक अंदाज में पेश किया जाएगा। 6 मार्च को आयोजित होने वाले बसंतोत्सव की शाम संगीत भवन के छात्र इस नाटक का मंचन करेंगे।

इतिहास को दोहराने की तैयारी नाटक के निर्देशक अमर्त्य मुखोपाध्याय ने बताया कि इस बार मंचन का आधार पूरी तरह से ‘हेरिटेज’ होगा। 1926 में गुरुदेव ने खुद जिस तरह से उत्तरायण के ‘कोणार्क’ घर में इसका निर्देशन किया था, उसी पुरानी शैली, संगीत और वेशभूषा को विश्वभारती के आर्काइव से मदद लेकर फिर से तैयार किया गया है। उस दौर में सभ्य समाज की महिलाओं का मंच पर आना एक बड़ी क्रांति थी, जिसे इस शताब्दी समारोह में फिर से महसूस किया जाएगा।

विरासत और उत्सव का संगम यूनेस्को ‘वर्ल्ड हेरिटेज’ का दर्जा मिलने के बाद, विश्वभारती अब अपनी ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है। यही कारण है कि बसंतोत्सव अब पारंपरिक होली के दिन न होकर पहले ही आयोजित किया जा रहा है। शाम के समय कोणार्क और श्यामली गृह के पास होने वाला यह मंचन दर्शकों को गुरुदेव के युग में ले जाएगा, जिससे बसंतोत्सव की गरिमा और बढ़ जाएगी।

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