ईरान के सर्वोच्च नेता के लिए भारत का संवेदना संदेश, अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई पर क्या है रुख?

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद भारत ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने ईरानी दूतावास जाकर ‘शोक पुस्तिका’ में हस्ताक्षर किए। शनिवार को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान में खामेनेई के मारे जाने के बाद भारत का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रंप का बयान और भारत का कदम: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को “इतिहास का सबसे दुष्ट व्यक्तित्व” करार दिया था। वहीं, भारत ने इस मामले में बेहद संतुलित रुख अपनाया है। न तो भारत ने अमेरिका की तरह जश्न मनाया और न ही रूस-चीन की तरह खुलकर निंदा की। लेकिन शोक संदेश भेजकर भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह मध्य पूर्व में अपने पुराने सहयोगी ईरान को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
कूटनीतिक संतुलन: विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश सचिव को भेजकर भारत ने एक तीर से दो शिकार किए हैं। एक तरफ ईरान के साथ अपने रिश्तों की गरिमा बनाए रखी, तो दूसरी तरफ किसी औपचारिक बयान से बचकर अमेरिका को भी नाराज नहीं होने दिया। रूस और चीन ने जहां इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है, वहीं भारत का मौन रहकर संवेदना जताना एक ‘साइलेंट मैसेज’ माना जा रहा है।