वोटर लिस्ट में ‘जिंदा’ लोगों को बताया ‘मुर्दा’? धर्मतला के मंच पर लाशों के साथ दीदी का धमाका!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को एक बार फिर उसी ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी नजर आईं, जहां से कभी उन्होंने बंगाल की सत्ता का रास्ता तय किया था। एसआईआर (SIR) के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ धर्मतला के मेट्रो चैनल पर बेमियादी धरने पर बैठीं ममता ने कहा, “आज मुझे फिर से सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन की याद आ रही है।” यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि 2006 में इसी जगह उन्होंने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।

इस धरना मंच पर केवल राजनीति नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति के बड़े चेहरे भी नजर आए। कबीर सुमन, नचिकेता, जय गोस्वामी और सुबोध सरकार जैसे दिग्गजों ने ममता का साथ दिया। ममता ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि साजिश के तहत 60 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं और अन्य 60 लाख नामों को ‘पेंडिंग’ रखा गया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “आयोग ने जिन्हें मृत घोषित कर दिया है, मैं उन 22 ‘जीवित’ लोगों को इसी मंच पर पेश करूंगी।”

ममता का यह तेवर 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘विपक्ष की नेता’ वाली छवि को फिर से जिंदा कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि वह हर एक इंच जमीन पर लड़ना जानती हैं। 20 साल बाद मेट्रो चैनल को फिर से विरोध का केंद्र बनाकर ममता ने यह संदेश दे दिया है कि वह एक बार फिर सड़क की लड़ाई के लिए तैयार हैं। जय-सुमन जैसे बुद्धिजीवियों की मौजूदगी ने इस आंदोलन को और भी धार दे दी है, जिससे बंगाल की राजनीति में एक बार फिर पुराने आंदोलनकारी दिनों की गर्माहट महसूस की जा रही है।

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