बंगाल में चुनाव की तारीखों का इंतजार खत्म! रविवार को कोलकाता पहुंचेगा चुनाव आयोग का फुल बेंच

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ की तैयारियों का जायजा लेने के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग का फुल बेंच आगामी रविवार, ८ मार्च को कोलकाता पहुंच रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग की १३ सदस्यीय टीम ९ और १० मार्च को राज्य के आला अधिकारियों, राजनीतिक दलों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के साथ अहम बैठकें करेगी। माना जा रहा है कि आयोग के इस दौरे के बाद १४ से १६ मार्च के बीच कभी भी विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो अप्रैल के मध्य में पहले चरण का मतदान होने की प्रबल संभावना है।

बाहरी राज्यों के जज सुलझाएंगे 60 लाख वोटरों का विवाद: इस बार बंगाल चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा ‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ यानी विचाराधीन लिस्ट में मौजूद ६० लाख मतदाताओं का है। इस विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ओडिशा और झारखंड से २०० न्यायिक अधिकारियों को बंगाल बुलाया गया है। ये जज ७ और ८ मार्च को कोलकाता पहुंचेंगे और ९ मार्च से संदिग्ध नामों की छंटनी का काम शुरू करेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जब तक इन नामों की स्थिति साफ नहीं हो जाती, मतदाता सूची को अंतिम नहीं माना जाएगा। इन जजों के ठहरने के लिए सिलीगुड़ी, आसनसोल, वर्धमान और कोलकाता जैसे शहरों में विशेष इंतजाम किए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय बलों की तैनाती: चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए पहले ही ४८० कंपनी केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) की तैनाती का आदेश दे दिया है, जिनमें से २४० कंपनियां १० मार्च तक राज्य में अपनी जगह संभाल लेंगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की टीम ९ मार्च को राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनेगी और अगले दिन मुख्य सचिव व डीजीपी के साथ सुरक्षा रोडमैप पर चर्चा करेगी। इसके अलावा, आयोग ने सभी बूथों पर वेबकास्टिंग और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। १० मार्च को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बंगाल में २०२६ के चुनावी महाकुंभ की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

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