60 लाख वोटरों के लिए आर-पार की जंग! कोलकाता में रातभर डटे रहे वामपंथी कार्यकर्ता, विमान बसु ने सौंपा ज्ञापन

पश्चिम बंगाल की राजनीति में वामपंथी आंदोलन के स्तंभ माने जाने वाले विमान बसु के साथ बुधवार को एक ऐसी घटना घटी, जो पिछले ५५ वर्षों के इतिहास में कभी नहीं हुई थी। मतदाता सूची में गड़बड़ी के खिलाफ कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के बाहर चल रहे धरने में विमान बसु को डॉक्टरों की सलाह पर रात के समय मंच छोड़कर घर जाना पड़ा। साल १९७१ के बाद यह पहला मौका था जब वे रातभर चलने वाले किसी राजनीतिक धरने में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं रह सके। उन्होंने भावुक होकर कहा, “यह पहली बार है जब मैं (रात को) रुक नहीं पाया।”

60 लाख वोटरों का हक और संघर्ष: वामपंथी दलों का आरोप है कि करीब ६० लाख मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ सूची में डालकर उनके मताधिकार को छीनने की साजिश रची जा रही है। इसी के विरोध में मोहम्मद सलीम और मीनाक्षी मुखर्जी जैसे नेताओं के साथ विमान बसु भी धरने पर बैठे थे। हालांकि रात को उन्हें जाना पड़ा, लेकिन गुरुवार सुबह वे फिर से प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए। उनके जोश को देखकर युवा कार्यकर्ता भी दंग रह गए।

सीईओ को अल्टीमेटम: गुरुवार को विमान बसु के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सीईओ मनोज अग्रवाल से मुलाकात की और चार सूत्री मांग पत्र सौंपा। विमान बसु ने कड़े शब्दों में कहा कि चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले इन ६० लाख लोगों की स्थिति साफ होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक भी वैध मतदाता का नाम काटा गया, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे। ५५ साल का रिकॉर्ड टूटने का दुख उनके चेहरे पर था, लेकिन लोकतंत्र को बचाने की उनकी जिद अब भी बरकरार है।

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