‘ऑपरेशन सिंदूर’ के हीरो पुरवेश नहीं रहे! असम में सुखोई क्रैश ने छीना देश का एक और जांबाज सपूत

भारतीय वायुसेना ने अपना एक और हीरा खो दिया है। असम के कार्बी आंगलोंग जिले में सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद हो गए हैं। इस हादसे में उनके साथ स्क्वाड्रन लीडर अनुज ने भी अपनी जान गंवाई है। पुरवेश की बहादुरी और देश के प्रति उनके जज्बे को याद कर आज पूरा देश गमगीन है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखाई थी वीरता: पुरवेश सिर्फ एक पायलट नहीं थे, बल्कि चुनौतियों से लड़ने वाले योद्धा थे। उनके पिता ने बताया कि पुरवेश ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे संवेदनशील मिशन का हिस्सा रहे थे। उस ऑपरेशन के दौरान वह 15 दिनों तक बिना मोबाइल के रहे और परिवार से संपर्क नहीं कर सके थे। उस खतरनाक मिशन से सुरक्षित लौटने वाले पुरवेश को शायद नियति ने असम की पहाड़ियों में बुला लिया था। वह अक्सर अपने परिवार को सुखोई की रफ्तार और हवाई करतबों की कहानियां सुनाया करते थे।
कैसे हुआ हादसा? बताया जा रहा है कि पुरवेश तेजपुर एयरबेस पर तैनात थे, लेकिन वहां रनवे के मेंटेनेंस का काम चलने के कारण वे जोरहाट से उड़ान भर रहे थे। शुक्रवार सुबह एक नियमित ट्रेनिंग मिशन के दौरान विमान ने जोरहाट से उड़ान भरी, लेकिन सुबह 7:42 बजे ग्राउंड कंट्रोल से उसका संपर्क टूट गया। काफी मशक्कत के बाद जोरहाट से करीब 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग के घने जंगलों में विमान का मलबा मिला। वायुसेना ने पुष्टि की है कि दोनों पायलटों को घातक चोटें आईं और वे वीरगति को प्राप्त हुए।
अधूरी रह गई यादें: पुरवेश अभी अविवाहित थे और हाल ही में 10 दिन पहले नागपुर में अपने घर एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने आए थे। उनकी मौत की खबर सुनते ही नागपुर में उनके घर पर मातम पसर गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। राष्ट्र अपने इन वीर सपूतों के बलिदान को हमेशा गर्व के साथ याद रखेगा।