“मणिपुर-असम पर चुप क्यों?” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे पर मंत्री बीरबाहा ने खड़े किए सवाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया दौरे और उनके भाषण को लेकर पश्चिम बंगाल की मंत्री बीरबाहा हसदा ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति एक संवैधानिक पद पर होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं।

मंत्री के मुख्य आरोप: १. निष्पक्षता पर सवाल: बीरबाहा हसदा ने कहा कि राष्ट्रपति से निष्पक्ष और संतुलित भाषण की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने बीजेपी द्वारा बंगाल के खिलाफ रचे गए नैरेटिव को ही दोहराया। २. चुनिंदा चुप्पी: मंत्री ने सवाल उठाया कि जब असम में आदिवासी परिवारों के घर जलाए गए या मणिपुर में आदिवासी समुदाय संकट में था, तब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया वैसी क्यों नहीं थी? ३. संवैधानिक मर्यादा: मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का पद गरिमापूर्ण होता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में की गई टिप्पणियां उस पद की मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। बीरबाहा ने घोषणा की है कि टीएमसी का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राष्ट्रपति से मुलाकात करने का समय मांगेगा। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा पारित ‘अपराजिता बिल’ का भी जिक्र किया, जो फिलहाल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए लंबित है।

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