नाम फाइनल, फिर भी डरा हुआ है ईरान! नए ‘सुप्रीम लीडर’ के ऐलान पर धार्मिक परिषद में छाई खामोश दहशत

ईरान में नेतृत्व के संकट के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, ईरान की शक्तिशाली 88-सदस्यीय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (धार्मिक परिषद) ने देश के अगले ‘सर्वोच्च नेता’ के नाम पर लगभग सहमति बना ली है। परिषद के सदस्य अयातुल्ला मोहम्मद मेहदी मीरबाकेरी ने रविवार को पुष्टि की कि ज्यादातर सदस्य एक नाम पर सहमत हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों और कुछ ‘प्रक्रियागत बाधाओं’ की वजह से अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

इजरायली हमलों का डर और गुप्त रणनीति ईरान के भीतर इस समय इतना डर है कि परिषद के सदस्य एक साथ बैठने से कतरा रहे हैं। अयातुल्ला मोहसेन हैदरी अल-कासिर ने वीडियो संदेश में कहा है कि मौजूदा हालात असामान्य हैं। सामूहिक बैठक करना ‘दुश्मनों’ (अमेरिका और इजरायल) को न्योता देने जैसा होगा। कुम शहर में पहले ही परिषद की इमारत पर हमला हो चुका है, इसलिए अब नए नेता का चुनाव किसी गुप्त स्थान से या डिजिटल तरीके से करने पर विचार हो रहा है।

मोजतबा खामेनेई: सबसे आगे, सबसे विवादित खामेनेई के 56 वर्षीय बेटे, मोजतबा खामेनेई का नाम इस रेस में सबसे आगे है। उनके पास आईआरजीसी (IRGC) का पूरा समर्थन है, जो ईरान की असली ताकत मानी जाती है। हालांकि, ईरान की जनता के बीच उनकी छवि एक कठोर प्रशासक की है, खासकर 2022 के हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उनकी भूमिका को लेकर काफी गुस्सा है। ट्रंप ने भी उन्हें ‘लाइटवेट’ कहकर खारिज कर दिया है, जिससे मोजतबा के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ गया है।

कहाँ फंसा है पेंच? अड़चन इस बात पर है कि बिना सार्वजनिक सभा के नए नेता को धार्मिक और कानूनी मान्यता कैसे दिलाई जाए। इजरायल ने पहले ही धमकी दी है कि नया नेता चुनते ही उसे भी मार गिराया जाएगा। ऐसे में ईरान का नया सुल्तान कौन होगा, यह राज तो खुल चुका है, लेकिन उसे दुनिया के सामने लाने की हिम्मत फिलहाल धार्मिक परिषद नहीं जुटा पा रही है।

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