“राज्यपाल को जाना था बागडोगरा”, राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे पर ममता ने चली ‘साजिश’ वाली चाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे से जुड़े विवाद पर चुप्पी तोड़ते हुए इसे भाजपा की एक सोची-समझी ‘साजिश’ करार दिया है। धर्मतला में धरने के तीसरे दिन ममता ने दावा किया कि प्रोटोकॉल के मुताबिक राष्ट्रपति का स्वागत करने की जिम्मेदारी राज्यपाल की थी, लेकिन जानबूझकर राज्य सरकार को निशाना बनाने के लिए खेल रचा गया।

“राज्यपाल के इस्तीफे की हो जांच” सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए ममता ने कहा, “बंगाल को दखल करने के चक्कर में बीजेपी ‘हेंगला’ (लालची) हो गई है। आखिर राज्यपाल को पद क्यों छोड़ना पड़ा? इसकी एक छोटी सी जांच होनी चाहिए।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर केंद्र चाहे तो राज्य की सीआईडी (CID) इस मामले की तह तक जा सकती है। ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने बंगाल के होटलों तक को बुक कर लिया है ताकि सत्ता पर कब्जा किया जा सके।

राष्ट्रपति के दौरे पर ‘सियासी खेल’ राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा राज्य सरकार पर लगाए गए असहयोग के आरोपों पर सफाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं राष्ट्रपति जी को दोष नहीं देती, लेकिन कल का पूरा घटनाक्रम प्री-प्लान्ड था। तय कार्यक्रम के अनुसार राज्यपाल को राष्ट्रपति को रिसीव करने बागडोगरा जाना था।” ममता ने आरोप लगाया कि कुछ लालची लोगों ने मिलकर यह पूरी स्क्रिप्ट तैयार की है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बंगाल की छवि खराब की जा सके।

बीजेपी को बताया ‘महिला विरोधी’ ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला तेज करते हुए उसे ‘महिला विरोधी’ पार्टी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम काट दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “मेरे अपने परिवार की एक लड़की का नाम काट दिया गया क्योंकि उसका पता बदल गया था।” एसआईआर (SIR) के खिलाफ अपना विरोध जारी रखते हुए ममता ने साफ कर दिया कि वह बंगाल के हितों के साथ समझौता नहीं करेंगी।

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