शह-मात का खेल! राष्ट्रपति की नाराजगी को पीएम मोदी ने बनाया चुनावी मुद्दा, बंगाल में सियासी उबाल

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस २०२६ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के शामिल न होने को पीएम मोदी ने ‘जनजातीय समाज और नारी शक्ति का अपमान’ करार दिया है।

क्या है पूरा विवाद? शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने सिलीगुड़ी आई थीं। प्रोटोकॉल के मुताबिक मुख्यमंत्री को उनका स्वागत करना था, लेकिन ममता बनर्जी उस समय कोलकाता में धरने पर बैठी थीं। राष्ट्रपति ने खुद मंच से खाली कुर्सियों और व्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद पीएम मोदी ने ‘X’ पर बांग्ला भाषा में पोस्ट लिखकर इसे ‘लज्जाजनक’ बताया था।

पीएम मोदी का कड़ा बयान: रविवार को एक कार्यक्रम में पीएम ने कहा, “आज हम महिला दिवस मना रहे हैं, और ठीक एक दिन पहले बंगाल में एक महिला राष्ट्रपति को अपमानित किया गया। द्रौपदी मुर्मू जी संघर्षों को पार कर इस मुकाम पर पहुंची हैं। उनका अपमान न केवल संविधान का अपमान है, बल्कि उन सभी महिलाओं का अपमान है जो जीवन में कुछ कर दिखाना चाहती हैं।” पीएम ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस आदिवासी समाज के विकास को रोकना चाहती है।

TMC का पलटवार: टीएमसी ने भी इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता तन्मय घोष ने कहा, “प्रधानमंत्री खुद राष्ट्रपति का सम्मान नहीं करते। जब नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ था, तब उन्होंने राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किया था। अब बंगाल चुनाव से पहले वे सहानुभूति बटोरने के लिए राष्ट्रपति का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं।”

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