बंगाल चुनाव 2026: चुनाव आयोग की बैठक में हंगामा, वामपंथियों ने लगाया 60 लाख वोटर गायब करने का आरोप!

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। आज कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की फुल बेंच ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और माकपा (सीपीआई-एम) के प्रतिनिधिमंडलों ने राज्य की कानून व्यवस्था और मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बीजेपी की कड़ी मांगें: बीजेपी ने आयोग के सामने 16 सूत्री मांगों का एक चार्टर पेश किया। पार्टी का मुख्य जोर इस बात पर था कि बंगाल में चुनाव भयमुक्त और शांतिपूर्ण होने चाहिए। बीजेपी नेताओं ने शिकायत की कि राज्य में केंद्रीय बलों का सही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि 2026 का चुनाव कम से कम चरणों में, यानी एक या दो चरणों में ही कराया जाए। साथ ही, संवेदनशील बूथों की पहचान पहले से करने और चुनाव के दौरान ‘पश्चिम बंगाल पुलिस वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन’ के कार्यालयों को बंद रखने की भी अपील की गई ताकि पुलिस का हस्तक्षेप कम हो सके।

वामपंथियों का ‘वोटर लिस्ट’ पर हमला: सीपीआई-एम नेता मोहम्मद सलीम और शमिक लाहिड़ी ने बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए। सलीम ने कहा कि मतदाता सूची के गहन संशोधन के नाम पर लगभग 60 लाख लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया। माकपा का दावा है कि आयोग ने खुद स्वीकार किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में बीएलओ (BLO) और एईआरओ (AERO) के स्तर पर बड़ी लापरवाही हुई है। वामदलों ने स्पष्ट किया कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं को बाहर रखकर पारदर्शी चुनाव संभव नहीं है।

अब सबकी नजरें चुनाव आयोग पर हैं कि वह इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है।

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