NCERT ने मांगी बिना शर्त माफी! न्यायपालिका के खिलाफ विवादित पाठ पढ़ाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका (Judiciary) में भ्रष्टाचार से संबंधित एक अध्याय शामिल करने पर मचे हंगामे के बाद एनसीईआरटी (NCERT) ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांग ली है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति के बाद संस्था ने स्पष्ट किया है कि विवादित सामग्री वाली इस किताब को तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया गया है। एनसीईआरटी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्वीकार किया कि छात्रों तक सटीक और सही जानकारी पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है और इस चूक के लिए वे खेद व्यक्त करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी हाल ही में प्रकाशित सामाजिक विज्ञान की पुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ के चौथे अध्याय में न्यायपालिका की ईमानदारी पर सवाल उठाने वाले तथ्य शामिल किए गए थे। इस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “किसी भी स्थिति में किसी को न्यायपालिका के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसी कोई भी सामग्री जो न्यायिक सत्यनिष्ठा पर सवाल खड़े करे, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” अदालत ने इस पुस्तक की छपाई और वितरण पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उठाया मुद्दा इस मामले को सबसे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के संज्ञान में लाया था। उन्होंने दलील दी थी कि स्कूली बच्चों को न्यायपालिका के बारे में इस तरह की नकारात्मक और असुधारित जानकारी देना संस्था की छवि खराब कर सकता है। कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए एनसीईआरटी ने अपना रुख बदला और ‘एक्स’ (Twitter) पर आधिकारिक माफीनामा जारी किया। अब संस्था इस पाठ्यपुस्तक के नए और संशोधित संस्करण पर काम कर रही है।

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