देश में तेल और गैस का संकट! केंद्र ने लागू किया १९५५ का ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के ११वें दिन भारत में ऊर्जा संकट गहरा गया है। कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने के कारण देश के बड़े शहरों में हाहाकार मचा है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, १९५५ (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य ईंधन और एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकना और समान वितरण सुनिश्चित करना है।
क्या होगा इस कानून से? एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानून के तहत सरकार अब पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता पर सीधा नियंत्रण रखेगी। सरकार की प्राथमिकता घरेलू पाइपलाइन गैस, एलपीजी सिलेंडर और आवश्यक परिवहन सेवाओं को सुचारू रखना है। देश के ३२ करोड़ से ज्यादा एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक विशेष निगरानी समिति का भी गठन किया गया है।
जमीनी हालात चिंताजनक: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से सप्लाई चेन टूट गई है। मुंबई में लगभग २०% होटल और रेस्टोरेंट कमर्शियल गैस की कमी के कारण बंद हो गए हैं। बेंगलुरु और चेन्नई में भी ऐसी ही स्थिति है। लोग अब गैस चूल्हों को छोड़कर इंडक्शन ओवन खरीदने के लिए बाजारों में उमड़ रहे हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।