२৫% बकाया डीए पर सुप्रीम कोर्ट में नया पेंच, सरकार ने मांगा दिसंबर तक का समय; १३ मार्च को बंगाल बंद का आह्वान

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए बकाया ২৫ प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा समिति की रिपोर्ट के बाद कर्मचारियों में भारी चिंता देखी जा रही है। राज्य सरकार ने कोर्ट में ३,১৭,৯৫৪ कार्यरत और ৬,৭৪,০০০ सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सूची तो सौंपी है, लेकिन इसमें स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के साथ-साथ पंचायत और नगर पालिका कर्मचारियों का कोई जिक्र नहीं है।

सरकार की रणनीति: राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि वे यह बकाया राशि तुरंत नहीं दे सकते और उन्हें ३১ दिसंबर २०२৬ तक का समय दिया जाए। सरकार की दलील है कि वे केवल ए, बी, सी और डी श्रेणी के कर्मचारियों को ही कवर कर रहे हैं। इस भेदभावपूर्ण सूची ने शिक्षकों और अन्य स्वायत्त निकायों के कर्मियों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है।

आंदोलन की चेतावनी: सरकार के इस कदम के खिलाफ ‘संग्रामी जोधो मंच’ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। उन्होंने न केवल कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है, बल्कि ১৩ मार्च को पूरे राज्य में हड़ताल (Strike) का आह्वान किया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब सरकार पहले उन्हें डीए का हकदार मानती थी, तो अब भुगतान के समय उन्हें सूची से बाहर क्यों रखा जा रहा है? बंगाल का प्रशासनिक गलियारा अब इस बड़े आंदोलन की आहट से सहमा हुआ है।

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